नागरिकता संसोधन बिल को लेकर राष्ट्रपति भी आये एक्शन में, मोदी और अमित शाह भी चौंक गए

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Birju Saini : 9 दिसंबर 2019 को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। बहुमत के कारण यह बिल आसानी से पास हो गया। इसी समय, इस बिल को 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में पेश किया गया, जहाँ इस बिल को 125 के विरुद्ध 99 मतों से पारित किया गया। इसके बाद इस बिल को माननीय राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया, जिसके बाद यह बिल कानून में परिवर्तित हो गया। पहले इस कानून के तहत, भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल तक यहां रहना अनिवार्य था, लेकिन इस बिल में संसोधन करके, ठहरने की अवधि को घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया।

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इस बिल के कानून बनते ही देश में हंगामा मच गया। नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ हर जगह विरोध शुरू हो गया। कई जगहों पर मीडिया के माध्यम से भी हिंसा की सूचना मिली है। नागरिकता संसोधन बिल को लेकर कांग्रेस की ओर से काफी आपत्ति जताई जा रही है। राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता इसे संविधान का उल्लंघन बता रहे हैं। दूसरी ओर, इस विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जनहित के लिए उठाया गया कदम बताया गया है। वहीं, केंद्र सरकार ने इस कानून पर मुहर लगाने के राष्ट्रपति के फैसले को बड़ा फैसला बताया है।

राष्ट्रपति ले सकते हैं बड़ा फैसला

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सीएए से जुड़ी हिंसा को लेकर मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में सोनिया के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, पी चिदंबरम, टीआर बालू, सपा नेता राम गोपाल यादव भी थे। इस दौरान नागरिकता कानून पर भी चर्चा हुई, अब कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति इस मामले पर जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

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