MP: राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट का पेंच, इन विधायकों पर है बीजेपी और कांग्रेस की नजर

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 2020 के अप्रैल में खाली होने वाली राज्यसभा की 3 सीटों पर होने वाले चुनाव (Rajya Sabha Election) को लेकर घमासान शुरू हो गया है. बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने इन सीटों पर कब्जा जमाने के लिए अभी से कवायद शुरू कर दी है. अभी बीजेपी के पास दो सीटें हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ एक पर काबिज है. अप्रैल में तीनों सीटें खाली हो रही हैं. जाहिर है इन सीटों के लिए कई दावेदार उभरकर सामने आ रहे हैं. कांग्रेस में जहां राज्यसभा के दावेदारों की संख्या कम है, वहीं बीजेपी में ऐसे कई नेता हैं, जिनकी नजर इस चुनाव पर है. भाजपा से अभी प्रभात झा (Prabhat Jha) और सत्यनारायण जटिया राज्यसभा के सांसद हैं, वहीं कांग्रेस की सीट पर दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) का कब्जा है. दो बार से सांसद बन रहे प्रभात झा को उम्मीद है कि पार्टी उन्हें तीसरी बार भी मौका देगी. मौजूदा सियासी गणित के तहत विधानसभा की दलीय स्थिति में एक-एक सीट बीजेपी कांग्रेस मिलेगी, जबकि तीसरी सीट को लेकर दोनों ही पार्टियों में उठक पठक जारी है. इस तीसरी सीट पर निर्दलीयों (Independent MLAs) की भूमिका अहम होगी. इसलिए कांग्रेस और भाजपा प्रदेश के निर्दलीय विधायकों पर नजरें जमाए हुए है..

बीजेपी की स्थिति

राज्यसभा सदस्य के लिए बीजेपी में दावेदारों की कमी नहीं है. मौजूदा सांसद प्रभात झा तीसरी बार राज्यसभा सदस्य बनना चाहते हैं, तो वहीं पार्टी के दूसरे नेताओं की दावेदारी भी प्रबल बताई जा रही है. इस बार राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी दौड़ में शामिल है. इसके अलावा महाकौशल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व महाधिवक्ता रविनंदन सिंह का नाम भी चर्चा में है. वहीं पिछली बार सदस्य बनने से चुके विनोद गोटिया भी रेस में हैं. गोटिया एक बार यह चुनाव लड़ चुके हैं. कुछ आदिवासी नेता भी दावेदारी कर रहे हैं. एक गुट आदिवासी नेता को सदस्य बनाना चाह रहा है. इसके अलावा चंबल से एससी कोटे से आने वाले लालसिंह आर्य का नाम भी चर्चा में है. प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना है कि राज्यसभा सदस्य कौन बनेगा, कौन नहीं बनेगा, इसका फैसला बीजेपी का संसदीय बोर्ड लेगा. पार्टी में नेता चुनने की एक व्यवस्था है. दावेदारी और अपनी बात रखने का सबको अधिकार है.

कांग्रेस की स्थिति

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की दावेदारी प्रबल बताई जा रही है. हालांकि इस बार यह आसान नहीं है. क्योंकि कांग्रेस में कई धड़े अपने नेता को आगे करने में लगे हुए हैं. कई ऐसे खेमे हैं, जिनकी नजर राज्यसभा सीट पर है. प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर कांग्रेस चाहती है कि इस बार दो सीटें उसके कब्जे में आ जाएं. एक सीट तो उसे मिलनी ही है, लेकिन दूसरी के लिए निर्दलीय विधायकों पर सबकी नजर है. निर्दलीय सरकार के साथ हैं, लेकिन सियासी समीकरण के चलते कांग्रेस ने अभी से सभी को साधना शुरू कर दिया है. कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल का कहना है कि इस बार कांग्रेस के पास 2 राज्यसभा सीट आएगी. हमारी पूरी कोशिश है कि तीसरी सीट बीजेपी को नहीं मिले. संगठन और सरकार मिलकर तैयारी कर रही है.

तीसरी सीट पर संघर्ष

अप्रैल में खाली होने वाली राज्यसभा की इन सीटों पर जीत के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने सियासी गणित बनाना शुरू कर दिए हैं. सियासी समीकरणों के अनुसार एक सदस्य के लिए 58 विधायकों का वोट जरूरी होता है. दो सीटों में एक बीजेपी और दूसरी कांग्रेस को मिलेगी, लेकिन तीसरी सीट के लिए कांग्रेस के 56 और बीजेपी के पास 50 विधायक रह जाएंगे. कांग्रेस को दो वोट जुटाने होंगे. दूसरी तरफ बीजेपी को आठ वोट चाहिए. इतने वोट को अपने पक्ष में करने के लिए अभी से समीकरण बनाए जा रहे हैं और लामबंदी शुरू हो चुकी है.

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